
भूजल स्तर को बचाने के लिए निजी बोरवेल खुदाई पर रोक
हरदा / कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, खण्ड हरदा द्वारा अवगत कराया गया है, कि हरदा जिले में विगत वर्ष की तुलना में वर्तमान भू-जल स्तर 39.8 मीटर है। आगामी ग्रीष्मकाल में अत्यधिक गर्मी / तापमान में वृद्धि होने के फलस्वरूप भू-जल स्तर में गिरावट संभावित है। वर्तमान में भू-जल स्तर को ध्यान में रखते हुए म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत निजी नवीन नलकूप खनन तथा जल स्त्रोतो से सिंचाई पर प्रतिबंध लगाया जाना आवश्यक है। आम जनो /व्यवसायिक संस्थाओ एवं अन्य उपयोग हेतु नलकूप खनन कराये जाते है, जिससे पेयजल स्त्रोत प्रभावित हो सकते है।
हरदा जिले में पेयजल एवं घरेलू प्रयोजनो हेतु पर्याप्त पेयजल को दृष्टिगत रखते हुए, मैं सिध्दार्थ जैन, कलेक्टर जिला हरदा (म.प्र.) इस निष्कर्ष पर पहुंचता हूँ। कि जनता को जल प्रदाय बनाये रखने के लिये एवं जल वितरण सुनिश्चित करने के लिये यह आदेश पारित करना आवश्यक व युक्तिसंगत है।

अतः म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 एवं (संशोधित) अधिनियम 2022 की (धारा (3) के अंतर्गत जनहित में समस्त हरदा जिले में 1 अप्रैल 2026 से 31 जुलाई 2026 तक / पर्याप्त वर्षा होने तक जल अभावग्रस्त घोषित करता हूँ। उक्त अधिनियम उपबंध तत्काल प्रभाव से हरदा जिले में लागू करता हूँ।

म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 एवं (संशोधित) अधिनियम 2022 की (धारा (3) एवं (4) के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुये मैं संपूर्ण हरदा जिले में नये वैयक्तिक (प्राईवेट) खनन होने वाले नलकूप, हैण्डपंप पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाता हूँ। बिना सम्यक अनुमति के कोई भी प्राईवेट ट्यूवेल / हैण्डपंप का खनन नही किया जाएगा और ना ही इस अवधि के दौरान जल स्त्रोंतो से कृषि हेतु सिंचाई, औद्योगिक कार्य हेतु उपयोग बिना सक्षम अनुमति से किया जावेगा। इस आदेश का उल्लंघन होने पर संबंधित के विरूध्द नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही की जाकर दंडित किया जायेगा। नलकूप खनन/सिचाई की अनुज्ञा जारी करने हेतु अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सर्व, जिला हरदा को अपने-अपने क्षेत्राधिकार हेतु अधिकृत किया जाता है।



















