
सिस्टम के जाल में उलझा अन्नदाता: समाधान के बजाय किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहा ई-उपार्जन पोर्टल।
हरदा / गेहूं उपार्जन हेतु स्लॉट बुकिंग 7 तारीख से शुरू हो चुकी है, लेकिन आज 16 तारीख हो जाने के बाद भी सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय लगातार उन्हें और बढ़ाने का काम कर रही है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति है।शुरुआत में स्लॉट बुकिंग के समय किसानों को पोर्टल पर “पुनः सत्यापन हेतु शेष” दर्शाया गया। पुनः सत्यापन के बाद “सैटेलाइट सत्यापन हेतु शेष” लिखा आने लगा और अब किसानों के सामने “सैटेलाइट द्वारा असत्यापित किया गया है” का प्रदर्शित किया जा रहा है।
जब पटवारी द्वारा गिरदावरी की जा चुकी है, खेतों में फसल प्रत्यक्ष रूप से मौजूद है और किसान द्वारा वही फसल पोर्टल पर दर्ज की गई है, तो फिर यह सत्यापन क्यों नहीं हो रहा? आखिर किसानों को इस प्रकार परेशान करने का कार्य क्यों किया जा रहा है? हजारों किसान इस तकनीकी अव्यवस्था का शिकार हो रहे हैं। ई-उपार्जन में स्लॉट बुकिंग के दौरान “सैटेलाइट द्वारा असत्यापित” का संदेश देकर किसानों को खरीदी प्रक्रिया से बाहर किया जाना सरासर गलत और अन्यायपूर्ण है।
आज किसान ऐसी स्थिति में पहुंच गया है कि घर में कई सारे खर्च लंबित हैं, बैंक एवं साहूकारों के कर्ज की किश्तें चुकाने में मुश्किल बनी हुई है, और सरकार के सिस्टम की गलती का पूरा खामियाजा किसान भुगत रहा है। क्या यही “कृषि कल्याण वर्ष” की सच्चाई है कि पहले खरीदी में देरी की जाए, फिर स्लॉट बुकिंग में तकनीकी अड़चनें खड़ी की जाएं और अंततः किसान को उसकी ही उपज बेचने से रोक दिया जाए?
यह स्थिति स्पष्ट दर्शाती है कि सरकार जमीनी हकीकत से पूरी तरह कट चुकी है और डिजिटल सिस्टम के नाम पर किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है।आपकी तकनीकी समस्या के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है इसलिए किसान को परेशान नहीं किया जाएं साथ ही खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाते हुए सभी तकनीकी बाधाओं को तुरंत हटाया जाए।k




















