भक्ति और ज्ञान की महिमाः सच्ची भक्ति और गुरु के प्रति समर्पण का प्रतीक

भक्ति और ज्ञान की महिमाः सच्ची भक्ति और गुरु के प्रति समर्पण का प्रतीक

हरदा / चारखेड़ा में आयोजित संत सिंगाजी महाराज की चौथे दिन  कि कथा मंडलेश्वर से पधारे दीदी श्री चेतना भारती द्वारा भावात्मक शैली में श्रवण कराई गई। दीदी श्री चेतना भारती ने कहा कि संत सिंगाजी महाराज की कथा के चौथे दिन उनकी समाधि के अद्भुत चमत्कार और लीला का वर्णन किया जाता है,

जिसमें बताया जाता है कि कैसे उन्होंने गुरु आज्ञा मानकर, एक गुप्त स्थान पर, शरीर को अक्षुण्ण रखते हुए समाधि ली, जिसके बाद उनके शरीर में छह महीने बाद भी वृद्धि (नाखून, बाल) और ताजगी देखी गई, जो उनकी परम भक्ति और अलौकिक शक्ति को दर्शाता है। गुरु आज्ञा और एकांतः गुरु ब्रह्मगीर बाबा के आदेश पर, सिंगाजी महाराज एक ऐसी जगह ढूंढने निकले जहाँ कोई न हो, और उन्हें एक गहरी गुफा मिली।
समाधि का निर्णयः उन्होंने उस गुफा में रहकर भजन करने का निश्चय किया, लेकिन स्थानीय लोगों ने उन्हें वहां से हटाने का प्रयास किया, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया और यहीं समाधि लेने का मन बनाया। अद्भुत चमत्कारः समाधि के बाद, उनका शरीर कई महीनों तक (लगभग छह महीने तक) बिल्कुल ताजा रहा, जैसे वे जीवित हों, और उनके नाखून व रोम बढ़ते रहे। भक्ति और ज्ञान की महिमाः यह कथा सच्ची भक्ति और गुरु के प्रति समर्पण का प्रतीक है, जिससे सिंगाजी महाराज अमर हो गए और निमाड़ क्षेत्र के आराध्य देव बन गए

 

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