जीव का परम लक्ष्य ही ईश्वर प्राप्ति है, स्वयं के स्वरूप को पहचानना है

हरदा ग्राम चारखेड़ा में परचरी पुराण का शुभारंभ

हरदा / ग्राम चारखेड़ा( टिमरनी )में संत सिंगाजी महाराज की भव्य परचरी पुराण का शुभारंभ हुआ। निमाड़ माटी की गौरव सुश्री दीदी चेतना भारती जी की सुमधुर वाणी में कथा का रसास्वादन समस्त भक्तगण कर रहे है। कथा का आयोजन  पटेल परिवार के द्वारा लोक कल्याण हेतु किया गया है। विशाल शोभायात्रा ग्राम के शिव मंदिर, राम जानकी मंदिर, दाना बाबा मंदिर, संत शिरोमणि परमहंस बाबा के रामजी बाबा मंदिर व मुख्य मार्ग से गुजरकर भव्य कथा पंडाल शिवधाम पहुंची। दीदीश्री ने कथा के प्रथम दिवस में पहले दिन शिष्य परंपरा तथा शृंगी ऋषि का कलयुग में सिंगाजी अवतार का वर्णन किया। परचरी पुराण के अनुसार यह भूमि पवित्र मानी जाती है शृंगी ऋषि ने सिंगाजी के रूप में वैशाख सुदी नवमी के दिन धरती पर अवतार लिया

कहा की माया की मार तो हर प्राणी खा रहा है और स्वयं को अशांति, कष्ट, अधोगति में पहुंचा रहा है जिन्हे काम क्रोध रूपी सर्प दिन रात सर्प करते है तथा रस्सी में सर्प प्रतीत होने वाले क्षणभंगुर सांसारिक सुखों और झूठे जगजंजाल को ही सत्य मानकर रिक्त हाथो से संसार छोड़ते है और पुन: पुन: संसार के बंधन में अलग अलग कष्ट प्रद योनियो में जन्म लेकर दुख भोगते रहते है। परंतु सिंगाजी महाराज की तरह कोई विरला महापुरुष ही होते है जो क्षुद्र को त्यागकर विराट का आलिंगन करते है,

आकाश में ऐसी ध्वजा लहरा जाते है जो युग युगांतर तक सबको ऐसी प्रेरणा देते रहते है की सांसारिक ऐश्वर्य प्राप्त करने के अलावा भी कुछ है जहा यात्रा पूर्ण होती है, जिसे पाकर कुछ भी अनपाया नही रह जाता। जीव का परम लक्ष्य ही ईश्वर प्राप्ति है, स्वयं के स्वरूप को पहचानना है। कथा के प्रथम दिवस में ही बड़ी संख्या में श्रोता गण उपस्थित रहे

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