
तीर्थ-यात्रा से भी बड़ा माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा पुण्य बताया : संतोष जी महाराज
संत शिरोमणि सिंगाजी महाराज की पांचदवसीय परचरी पुराण का आयोजन पेटवाले परिवार ग्राम धौलपुर कला जिला हरदा में आयोजित कथावाचक श्री संतोष जी महाराज दूध तलाई धाम सिंगाजी के मुखारविंद से सिंगाजी महाराज की परचरी कथा के चौथे दिन व्यास पीठ से संतोष जी महाराज दूध तलाई धाम सगाजी ने ‘तीर्थ का महत्व’ और ‘मन के भीतर के ईश्वर’ पर जोर दिया, जिसमें उन्होंने समझाया कि बाहरी तीर्थों से बढ़कर घर के अंदर, माता-पिता की सेवा और मन की पवित्रता ही सबसे बड़ा तीर्थ है, और इस पर फोकस करते हुए बताया कि सच्ची भक्ति के लिए तीर्थ जाने की ज़रूरत नहीं, बल्कि मन को साफ़ रखना ज़रूरी है।
तीर्थ की परिभाषाः संतोष जी महाराज ने समझाया कि तीर्थ यात्रा का उद्देश्य मन को शुद्ध करना है, लेकिन लोग बाहरी तीर्थ स्थलों पर भटकते हैं, जबकि सबसे बड़ा तीर्थ तो व्यक्ति के अपने भीतर, अपने घर में ही होता है। माता-पिता की सेवाः उन्होंने माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ा पुण्य बताया, जिसे करने वाला व्यक्ति तीर्थ-यात्रा से भी बड़ा लाभ प्राप्त करता है और उसे कहीं और जाने की आवश्यकता नहीं होती।





















