आज पूरा देश और दुनिया आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा रामलला अब राम मंदिर में विराजित हो चुके हैं।

आज पूरा देश और दुनिया आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा रामलला अब राम मंदिर में विराजित हो चुके हैं।

भोपाल/ आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। आज वर्षों के बाद रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हो चुका है रामलला अब राम मंदिर में विराजित हो चुके हैं। भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य यजमान के रूप में सम्मलित हुए। प्रधानमंत्री मोदी प्राण प्रतिष्ठा के दौरान चांदी का एक विशेष थाल लेकर पहुंचे। थाल में लाल रंग का वस्त्र और चांदी का छत्र भी था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चढ़ाए गए वस्त्र, छत्र और कमल के फूल का धार्मिक महत्व क्या है और देवताओं के पूजन में इसकी क्या मान्यता है।

आइए जानते हैं। कुशा का महत्व

प्रधानमंत्री ने पूजा के दौरान कुशा धारण की थी। पूजा पाठ में कुशा का भी विशेष महत्व है। कुशा एक पवित्र घास हैं जिससे नकारात्मकता दूर होती है। कहते हैं कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। मत्स्य पुराण के अनुसार एक बार जब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध किया और धरती बनाई तब उन्होंने अपने शरीर पर से पानी को झाड़ा इस दौरान उनके शरीर से बाल धरती पर गिरे और कुशा के रूप में बदल गए। कुशा की अंगूठी बनाकर तीसरी उंगली यानी अनामिका उंगली में पहनी जाती है जिसे पवित्री के नाम से भी जाना जाता है। इसके उपयोग से मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से पवित्रता हो जाती है इसलिए इसे पूजा-पाठ में हर जगह उपयोग किया जाता है। पूजा-पाठ के दौरान जगह पवित्र करने के लिए भी कुशा से जल छिड़का जाता है

प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद पीएम मोदी ने तोड़ा अपना 11 दिन का उपवास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद अपना 11 दिन का उपवास तोड़ा दिया है। गोविंद देव गिरि महाराज द्वारा उन्हें ‘चरणामृत’ (अनुष्ठानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला दूध से बना मीठा पेय) पिलाने के बाद उन्होंने अपना उपवास को तोड़ है। गोविंद देव गिरि महाराज ने अपने 11 दिवसीय अनुष्ठान को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए पीएम मोदी की प्रशंसा करते हुए उनकी भक्ति की तारफ की

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